杜牧選集五

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石,後即用以稱郎將、郡守、知府。

    誅洗,討伐消滅。

    條,條例,此用作動詞,意謂引以爲例。

    代宗大曆間(七六六—七七九),朱泚、朱滔等殺節度使自爲留後,朝廷不予追究,而任其爲節度使,後朱泚叛亂,自稱皇帝,叛兵攻入京城,德宗倉皇出走,賴渾瑊、李晟等平定之。

    其後,德宗貞元間(七八五—八〇四),諸鎮復相繼叛亂,朝廷照例姑息養奸(參《感懷詩》“齊蔡燕趙魏”注)。

     〔二〕逆輩,謂叛鎮。

    橫(hènɡ),橫暴。

     〔三〕幹戈兩句:幹戈,兵器。

    鈇鉞(fūyuè),亦兵器名。

    鈇,斧。

    鉞,青銅所製,形狀如斧。

     〔四〕含引混貸:寬容姑息之意。

    含,包容。

    引,引進。

    混,苟且。

    貸,寬免。

     〔五〕煦育逆孽:給予叛鎮以恩惠。

    逆孽,謂叛鎮。

     〔六〕殆:幾乎。

    故常:常例。

     〔七〕執事大人:謂朝廷大臣。

     〔八〕歷算周思:周密地推算思考。

    歷,通“曆”,推算。

    周,完密。

     〔九〕宿謀:老謀深算。

     〔一〇〕方且句:謂卻在高傲自得。

    嵬(wéi)岸,雄偉。

    抑揚,俯身揚首,自得貌。

     〔一一〕廣大繁昌:謂國力強大繁榮昌盛。

    莫己若:莫若己,不如自己。

     〔一二〕其:難道。

    蹇(jiǎn)頓顛傾:傾覆滅亡。

    蹇頓,困躓。

    顛傾,覆滅。

    支計:撐持籌畫。

     〔一三〕蟠城:指叛鎮盤踞之城。

     〔一四〕金堅蔓織:喻持兵器着甲胄者之多。

    金,兵刃。

    堅,甲胄。

    蔓,蔓延。

     〔一五〕角奔爲寇:争相爲寇。

     〔一六〕顦顇:同“憔悴”。

     〔一七〕朋伍:同夥。

     〔一八〕羅絡郡國:謂藩鎮間勾結如羅網。

     〔一九〕駭亂:使人驚惶混亂。

     〔二〇〕吾:指朝廷。

     〔二一〕偷處恬逸:苟且圖安。

    偷,苟且。

    恬逸,安樂。

     〔二二〕第第相付:因循沿襲之意。

    付,授。

     〔二三〕以爲句:意謂遺患後代。

    脅,身軀兩側自腋下至肋骨盡處。

    疽(jū),毒瘡。

     〔二四〕倔強(jiànɡ):強硬。

     〔二五〕吾以句:謂我用良將勁兵駕馭強橫之徒。

    銜策,手持馬鞭。

    《資治通鑑》胡注:“銜策,所以馭馬。

    ”策,馬鞭。

     〔二六〕安而兩句:謂使其安定而不擾亂,居外而不予限制。

    撓,擾。

     〔二七〕豢(huàn)擾:豢養馴服。

    《資治通鑑》胡注:“豢,養也。

    擾,馴也,順也。

    ”拂:違逆。

     〔二八〕法故:《資治通鑑》作“法度”。

     〔二九〕闊視:傲視。

     〔三〇〕養威:揚威的反義,怕事的宛轉説法。

     〔三一〕有司句:謂官吏偷安而不加制約。

     〔三二〕通爵:通侯的爵位名。

    通侯原稱徹侯,因避漢武帝劉徹諱,改稱通侯。

    此泛指坐鎮一方之藩鎮。

     〔三三〕越録:謂濫賜爵祿。

    《資治通鑑》胡註:“凡賞功者録其功而加之封爵,無功而超越授之以爵,是謂越録。

    ” 〔三四〕覲(jìn)聘兩句:謂藩鎮失禮,不按時覲見天子,朝廷不予論罪,反賜以幾杖安慰之。

    覲聘,朝拜天子,遣使通問。

    幾杖,幾案和手杖,古時帝王用以恩賜臣下以爲敬老之禮。

     〔三五〕逆息兩句:謂天子以公主下配藩鎮之子爲婦。

    逆息虜胤,謂叛鎮之子孫後代。

    《資治通鑑》胡注:“息,子也。

    胤,繼嗣也。

    河北蕃將之子,率多尚主。

    ”皇子,公主。

    嬪(pín),婦,此用作動詞。

     〔三六〕裝緣采飾:謂公主之妝奩富麗多彩。

    裝,通“妝”。

    緣,緣飾,文飾。

     〔三七〕僭(jiàn)擬:超越名分比擬天子。

     〔三八〕土田:土地。

    名器:爵位與車服儀制等。

     〔三九〕未及句:謂其貪心無有止境。

    畔岸,邊際。

     〔四〇〕淫名越號:不守法度,濫用名號。

     〔四一〕盟詛(zǔ):盟誓。

     〔四二〕恬淡不畏:安然自若,毫無懼色。

     〔四三〕走兵四略:派兵四出掠奪。

     〔四四〕飽:滿足。

     〔四五〕趙魏兩句:《資治通鑑》胡注:“謂朱滔、王武俊、田悅、李納相立爲王。

    李希烈、李錡、劉闢繼亂也。

    ”卓起,指朱滔等擅自稱王。

     〔四六〕躡(niè)而和(hè)之:追隨其後而響應之。

     〔四七〕混澒(hònɡ)軒囂:雜亂喧鬧。

    混澒,水深廣貌,此喻雜亂。

     〔四八〕孝武:指憲宗,其尊號爲“昭文章武大聖至神孝皇帝”。

     〔四九〕宵旰(ɡàn):宵衣旰食。

    謂未明而衣,既暮而食,喻勤於政事。

    旰,晚。

     〔五〇〕大者兩句:謂憲宗于元和十二年(八一七)誅滅吳元濟,一舉平定淮西,其他藩鎮恐懼,遂相繼上表歸順,暫時形成統一局面。

    惠來,以恩惠招徠之。

     〔五一〕周秦兩句:謂河南、關内一帶幾爲叛鎮侵佔。

    《資治通鑑》胡注:“周秦之郊,謂河南、關内也。

    ”獵,取也。

     〔五二〕油然:充盛貌。

     〔五三〕教笞(chī):教訓鞭打。

     〔五四〕區區:小貌。

    無涯:無窮盡。

     〔五五〕支:通“肢”。

     〔五六〕運掉:轉動。

     〔五七〕經:常。

     序文批評朝廷對叛鎮行姑息之政,以隱忍苟且而貽後患。

    本文第一段指出對河北叛鎮不圖擒取,必爲子孫患。

    第二段駁斥議者以大曆、貞元姑息之政爲守邦之謬論,認爲姑息適足以助長藩鎮之叛逆野心,後患無窮,故對叛鎮應予征伐。

    末尾説明大曆、貞元守邦之術不足恃,應引以爲戒。

     《資治通鑑》卷二四四曾將杜牧所著《罪言》、《原十六衞》、《戰論》、《守論》、《注孫子序》五文予以摘要抄録,數量之多,實爲罕見,可見司馬光對杜牧文章的重視。

    其實,在《感懷詩》中,詩人即已對德宗以來朝廷縱容藩鎮之姑息政策深緻不滿,而至文宗大和年間,形勢更加險惡,故著文專論戰守之癥結。

    《戰論》中“四支”“五敗”之論,深中時弊,獨具卓見。

    謝枋得曰:“唐自府兵既弛,藩鎮跋扈,要君者皆是羈縻,奉命者十二三耳。

    此論若當時振起行之,未必不可反危爲安,不徒文字嚴卓可垂也。

    ”(《古文淵鑒》引)徐乾學曰:“四支、五敗,字字精確,而文亦磊砢自喜。

    ……風規峻邁,文采焰然。

    ”(《古文淵鑒》)厲鶚、譚獻評曰:“樊川論時事之文,是得力于《戰國策》,極縱橫馳驟之緻。

    ”(《唐文粹》) 《守論》一文,極論苟且自守之弊,指出大曆、貞元對藩鎮之姑息非守邦之術,而是危國之道,文中檢討前朝之失,亦切中癥結。

    謝枋得評此文曰:“指畫禍亂本根,皆必至之理。

    文字嚴緊,無矜張之氣。

    ”(同上)又,厲鶚、譚獻曰:“樊川憂國之心與少陵同。

    ”(《唐文粹》) 上知己文章啓〔一〕 某啓。

    某少小好爲文章,伏以侍郎〔二〕,文師也〔三〕,是敢謹貢七篇〔四〕,以爲視聽之污〔五〕。

    伏以元和功德〔六〕,凡人盡當歌詠記叙之,故作《燕將録》。

    往年弔伐之道未甚得所〔七〕,故作《罪言》。

    自艱難來始,卒伍傭役輩,多據兵爲天子諸侯,故作《原十六衞》。

    諸侯或恃功不識古道,以至于反側叛亂,故作《與劉司徒書》。

    處士之名〔八〕,即古之巢、由、伊、呂輩〔九〕,近者往往自名之,故作《送薛處士序》。

    寶曆大起宮室〔一〇〕,廣聲色〔一一〕,故作《阿房宮賦》。

    有廬終南山下〔一二〕,嘗有耕田著書志,故作《望故園賦》。

    雖未能深窺古人,得與揖讓笑言,亦或的的分其貌矣〔一三〕。

     自四年來,在大君子門下〔一四〕,恭承指顧〔一五〕,約束於政理簿書間,永不執卷〔一六〕。

    上都有舊第〔一七〕,唯書萬卷,終南山下有舊廬,頗有水樹,當以耒耜筆硯歸其間〔一八〕。

    齒髮甚壯〔一九〕,間冀有成立〔二〇〕,他日捧持〔二一〕,一遊門下,爲拜謁之先,或希一獎。

    今者所獻,但有輕黷尊嚴之罪〔二二〕,亦何所取。

    伏希少假誅責〔二三〕,生死幸甚。

    謹啓。

     〔一〕此篇作于文宗大和八年,時在揚州牛僧孺淮南節度使幕中。

    知己:指沈傳師。

    自文宗大和二年秋至七年春,牧之曾在傳師江西幕府和宣州幕府任職,甚得賞識,故視傳師爲知己。

     〔二〕伏:敬詞。

    侍郎:指沈傳師,傳師曾任吏部侍郎,故稱(參《張好好詩》注〔三〕)。

     〔三〕文師:謂能文者。

    傳師博學能文。

     〔四〕謹貢:敬獻。

     〔五〕視聽之污:謙辭。

    意謂自己的文章有辱傳師耳目。

     〔六〕元和功德:謂憲宗平定淮西等掃蕩叛鎮之功。

     〔七〕弔伐之道:伐罪弔民之舉,指討伐叛鎮,拯救百姓。

    任昉《百辟勸進今上箋》:“伐罪弔民,一匡靖亂。

    ” 〔八〕處士:隱居不仕之士。

     〔九〕巢:巢父,傳爲唐堯時隱士,在樹上築巢而居,故稱。

    由:許由,上古高士,隱于箕山。

    傳説堯讓天下與巢父,巢不受,與許由,亦不受。

    伊:伊尹,商湯大臣。

    原爲湯妻陪嫁奴隸,後助湯伐桀。

    呂:呂尚,即姜太公,傳説釣于渭濱,周文王出獵相遇,與語大悅,同載而歸,立爲師,後輔武王滅紂。

     〔一〇〕寶曆:唐敬宗年號(八二五—八二六)。

     〔一一〕廣:廣收。

     〔一二〕廬:指樊川别墅,在終南山下。

    《樊川記》:“萬年縣南二十裡,是爲樊川,西爲韋曲,東爲杜曲,中有莊林亭卉,最爲幽邃。

    ”終南山:一名南山,又稱秦山,在陝西長安縣西五十裡,東至藍田縣,西至郿縣,綿亘八百餘裡。

    張衡《西京賦》:“終南、太乙,隆崛崔崒。

    ” 〔一三〕的的:昭著貌。

     〔一四〕大君子:謂沈傳師。

     〔一五〕指顧:手指目顧,謂照顧。

     〔一六〕約束兩句:意謂忙于公務,久不讀書。

    政理,謂事務。

    簿書,文書。

    永,久。

     〔一七〕上都:京都。

     〔一八〕耒耜(lěisì):均耕具。

     〔一九〕齒髮:謂年齡。

     〔二〇〕間(jiàn):間或;偶然。

    成立:成就。

     〔二一〕捧持:奉獻。

     〔二二〕輕黷(dú):怠慢不敬。

     〔二三〕伏希句:自謙語,謂望其原諒,勿多責備。

    少,稍。

    假,給予。

    誅責,責怪。

     薦王寧啓〔一〕 前渭南縣令王寧〔二〕。

    前件官實有吏才〔三〕,稱於衆口,年少強力〔四〕,一也。

    遇事必能裁割〔五〕,二也。

    既藴智能〔六〕,無頭角誇誕〔七〕,三也。

    廉直可保,四也。

    處於驕將内臣之間〔八〕,必能和同〔九〕,五也。

    今者邊將生事,雜虜起戎〔一〇〕,不憂兵甲,唯在饋運〔一一〕,某過承恩獎〔一二〕,故敢薦才,伏惟取捨之間〔一三〕,特賜恕察。

    謹啓。

     〔一〕此篇作于大和九年(八三四),時年三十三歲。

     〔二〕渭南縣:本漢新豐縣地,置于苻秦,西魏廢帝二年,改南新豐爲渭南縣。

    今屬陝西省。

     〔三〕前件官:前所舉之官,上列之官,唐宋公文常語。

    即指王寧。

     〔四〕強力:精力強健。

     〔五〕裁割:善決斷。

     〔六〕藴:藏,具有。

     〔七〕頭角:頭頂左右突出處,此喻驕傲。

    誇誕:誇大虛妄。

     〔八〕驕將:指跋扈之藩鎮和驕悍之邊將。

    内臣:指弄權之宦官。

     〔九〕和同:調停使之和睦。

     〔一〇〕雜虜:指邊境少數民族。

    起戎:掀起戰争。

     〔一一〕饋(kuì)運:運送糧食,供應軍需。

     〔一二〕過承恩獎:謙辭,謂過分蒙受獎勵。

     〔一三〕伏惟:古人書劄中常用之敬辭。

     大和九年,杜牧由淮南幕府掌書記轉真監察禦史,赴長安供職。

    唐制,監察禦史掌分察百官、巡撫州縣獄訟、祭祀及監諸軍出使等,故任職伊始,特向有司薦舉富于才幹、年少有爲的王寧。

    書啓僅用百字,即已概括王寧之特點,可謂簡煉有法。

     投知己書〔一〕 夫子曰〔二〕:“不怨天,不尤人,下學而上達,知我者其天乎?”復曰:“知我者《春秋》,罪我者亦以《春秋》〔三〕。

    ”此聖人操心〔四〕,不顧世之人是非也。

    柱厲叔事莒敖公,莒敖公不知,及莒敖公有難,柱厲叔死之〔五〕。

    不知我則已,反以死報之,蓋怨不知之深也。

    豫讓謂趙襄子曰:“智伯以國士待我,我以國士報之〔六〕。

    ”此乃烈士義夫,有才感其知,不顧其生也。

    行無堅明之異,材無尺寸之用,泛泛然求知於人〔七〕,知則不能有所報,不知則怒,此乃衆人之心也。

    聖賢義烈之士,既不可到,小生有異於衆人者,審己切也〔八〕。

    審己之行,審己之才,皆不出衆人,亦不求知於人,已或有知之者,則藏縮退避,唯恐知之深,蓋自度無可以爲報效也。

    或有因緣他事〔九〕,不得已求知於人者,苟不知,未嘗退有懟言怨色〔一〇〕,形於妻子之前,此乃比於衆人,唯審己求知也。

     大和二年〔一一〕,小生應進士舉〔一二〕,當其時,先進之士〔一三〕,以小生行可與進,業可益修,喧而譽之,争爲知己者不啻二十人〔一四〕。

    小生邇來十年江湖間,時時以家事一抵京師,事已即返,嘗所謂喧而譽之爲知己者,多已顯貴,未嘗一到其門。

    何者?自十年來,行不益進,業不益修,中夜忖量,自愧於心,欲持何説,復於知己之前爲進拜之資乎!默默藏縮,苟免寒饑爲幸耳。

     昨李巡官至〔一五〕,忽傳閣下旨意,似知姓名,或欲異日必録在門下。

    閣下爲世之偉人鉅德,小生一獲進謁,一陪宴享,則亦榮矣,況欲異日終置之於榻席之上〔一六〕,齒於數子之列乎〔一七〕!無攀緣絲髮之因〔一八〕,出特達倜儻之知〔一九〕,小生自度宜爲何才,可以塞閣下之求;宜爲何道,可以報閣下之德。

    是以自承命已來〔二〇〕,審己愈切,撫心獨驚〔二一〕,忽忽思之〔二二〕,而不自知其然也。

     若蒙待之以衆人之地〔二三〕,求之以衆人之才,責之以衆人之報,亦庶幾異日受約束指顧於簿書之間〔二四〕,知無不爲,爲不及私,亦或能提筆伸紙,作詠歌以發盛德,止此而已。

    其他望於古人,責以不及,非小生之所堪任。

    伏恐閣下聽聞之過〔二五〕,求取之異,敢不特自發明〔二六〕,導説其衷,一開閣下視聽。

    其他感激發憤,懷愧思德,臨紙汗發,不知所裁。

    某恐懼再拜。

     〔一〕此篇作于文宗開成二年(八三七),時年三十五歲。

    知己:指崔鄲(dān)。

    鄲係杜牧中進士時座師崔郾之弟,時爲宣歙觀察使。

    杜牧開成元年爲監察禦史,分司東都。

    次年,因弟杜顗目疾,告假赴揚州。

    假滿百日,按例“停解”(解職)。

    于是上書宣歙觀察使崔鄲,望其援引。

    是年秋末,應崔鄲之召,入宣州幕,爲團練判官、殿中侍禦史内供奉。

     〔二〕夫子:孔子。

    下引四句見《論語·憲問》。

     〔三〕知我兩句:見《孟子·滕文公下》引孔子語,今本作:“知我者,其惟《春秋》乎?罪我者,其惟《春秋》乎?” 〔四〕操心:用心。

     〔五〕柱厲叔四句:《列子·説符篇》:“柱厲叔事莒敖公,自爲不知己,去居海上。

    ……莒敖公有難,柱厲叔辭其友而往死之。

    其友曰:‘子自以爲不知己,故去,今往死之,是知與不知無辨也。

    ’柱厲叔曰:‘不然,自以爲不知,故去,今死,是果不知我也。

    吾將死之,以醜後世之人主不知其臣者也。

    ’”《呂氏春秋·恃君》亦載此事,文字略異。

    莒(jǔ)敖公,莒國國君。

     〔六〕豫讓三句:事見《戰國策·趙策》。

    
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